Yaum e Ashura Ki Fazilat - 10 Muharram Ki Fazilat in Hindi

Ashura Ke Roze Ki Fazilat | 9 Aur 10 Muharram Ke Roze Ki Fazilat

Yaum e Ashura (10 Muharram) Kya Hai ? 

यौमे आशुरा, मोहर्रम महीने की 10 वीं तारीख है । ‘यौमे आशूरा’ दुनिया भर के मुसलमानों के लिए एक बेहद खास दिन है । इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से ‘आशूरा’ या मुहर्रम के 10वें दिन में आप () के नवासे हज़रत इमाम हुसैन (रजि.) की मैदान-ए-करबला में जंग के दौरान शहादत हुई थी । यह साल 680 ईस्वी का वक्त था । इस्लामी कैलेंडर के हिसाब से  मोहर्रम साल का पहला महीना है । आशूरा के दिन जो कोई भी शख्स अल्लाह तआला की इबादत करें उसे बहुत बड़ा अजर मिलता है ।

हज़रत इब्न अब्बास (रजि.) से रिवायत है कि रसूले अकरम () का इरशाद है कि मोहर्रम में रोजा रखने वाले को हर रोजे के बदले 30 रोजों का सवाब मिलता है । आप () ने इरशाद फरमाया कि जो शख्स मोहर्रम में आशूरा के दिन रोजा रखेगा उसे 10000 शहीदों और 10000 हाजियों का सवाब मिलता है । (सुब्हानअल्लाह) ! जो इस रोज किसी यतीम के सर पर मोहब्बत का हाथ रखे तो उसे इसके सर के बालों के बराबर जन्नत में ऊंचा मकाम मिलता हैं और जो इस रात में किसी मोमिन को खाना खिलाएं वह ऐसा है जैसे उसने आप () की तमाम उम्मत को खाना खिलाया हो ।

आशूरा का रोजा (Ashura Ka Roza) - 10 Muharram Ka Roza

आज आप जानेंगे आशूरा के रोजे की फजीलत (Ashura Ke Roze Ki Fazilat) / 10 मुहर्रम के रोजे की फजीलत (10 Muharram Ke Roze Ki Fazilat) हिन्दी में । उम्मीद करते हैं कि आपको ये पोस्ट जरूर पसन्द आएगा ।


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Yaum e Ashura (10 Muharram) Ki Fazilat Hindi Mein 


अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ि.) से रिवायत है कि जब अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने आशूरा का रोजा (Ashura Ka Roza) रखा और इस दिन रोजा रखने का हुक्म दिया तो लगों ने अर्ज़ किया , " या रसूलुल्लाह (ﷺ) ! ये दिन तो ऐसा है कि इसकी ताज़ीम यहूद और नसारा करते हैं । तो आप (ﷺ) ने फरमाया कि जब अगला साल आएगा तो इंशाअल्लाह हम 9 वें दिन का रोजा रखेंगे । लेकिन अगला साल आने से पहले ही आप (ﷺ) इस दुनिया से पर्दा कर गए । यही वजह है कि हम मुसलमान 9 वीं और 10 वीं मुहर्रम का रोजा (10 Muharram) रखते हैं ।

📓 Sahih Muslim, Vol 3, 2666


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Muharram Date Kab Hai 2021 Mein ?

Muharram 20 अगस्त 2021 को है ।


10 मुहर्रम (Muharram) का रोजा रखने की फजीलत

अबू कतादा अल-अन्सारी (रज़ि.) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (ﷺ) से आशूरा के रोजे (10 मुहर्रम का रोजा) के बारे में पूछा तो आप (ﷺ) ने फरमाया , " ये गुजरे हुए साल के गुनाहों का कफ्फारा करता है ।

📓 Sahih Muslim, Vol 3, 2747


यहूदी आशूरा (Ashura) का रोजा क्यों रखते हैं ? 

10 मुहर्रम को अल्लाह तआला ने हजरत मूसा (अलैहिस्सलाम) की उम्मत को फिरौन के कैद से आजाद करवाया और फिरौन को पानी में गर्क़ कर दिया । लिहाज़ा इस के शुकराने के तौर पर मूसा (अलैहिस्सलाम) की उम्मत आशूरा का रोजा (Ashura Ka Roza) रखती थी ।


उम्मते मुहम्मदिया को 9 वीं और 10 वीं या फिर 10 वीं और 11 वीं का रोजा रखना है । ताकि यहूद और नसारा से मुसाबहत ना हो और उनकी मुखालफत हो । उनकी मुखालिफत के ताल्लुक से उलेमा कहते हैं कि उनकी मुखालिफत का हुक्म इसीलिए दिया गया क्योंकि वो कौम भी ऐजाज़ पाने के बाद अल्लाह और उसके नबियों के हुक्म की मुखालिफत करने लग गए थे । लिहाज़ा उनकी मुखालिफत में हमलोगों को 1 के बजाय 2 रोजे रखने का हुक्म मिला ।

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10 वीं मुहर्रम (Muharram) को शर्बत बांटना कैसा है ? 


हमने कई ऐसे लोगों को देखा है जो 10 वीं मुहर्रम को शर्बत बांटते हैं । जब आप उनसे इसकी वजह पूछेंगे तो वो कहते हैं कि नवासे रसूल (ﷺ) प्यास की हालत में शहीद हुए थे इसीलिए हम शर्बत बांट रहे हैं । ये काम सरासर गलत है । शर्बत बांटने के बजाय हमें 10 वीं मुहर्रम के दिन रोजा रखना चाहिए । (और एक रोजा 9 वीं को , या 11 वीं को रखना चाहिए । लगातार दो दिन रोजा रखना है । 1 दिन का रोजा हरगिज न रखें ।)


आशूरा के रोजे की फजीलत - Ashura Ke Roze Ki Fazilat in Hindi


रमजान उल करीम के बाद सबसे अफजल रोजा मुहर्रम का है ।

हदीस 01 :

हज़रत अबू हुरैरा (रज़ि.) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया ;  सब रोजों में सबसे अफजल रमजान का रोजा और उसके बाद मुहर्रम का रोजा (Muharram Ka Roza) है, जो अल्लाह तआला का महीना है ।"

📓 : Sahih Muslim, Volume : 03, Page : 246, Kitab-As-Saum, Baab : Muharram Me Roze Ki Fazilat, Hadees : 2755 “Online No : 2611


यौम-ए-आशूरा (10 मुहर्रम) का रोजा रखना सुन्नत-ए-रसूल () है ।


हदीस 02 :

हज़रत अब्दुल्ला इब्न अब्बास (रजि.) से रिवायत है , नबी ए करीम (ﷺ) जब मदीना तशरीफ लाए तो उन्होंने यहुदियों को देखा कि वो आशूरा के दिन रोजा (Ashura Ke Din Roza) रखते हैं । तो आप (ﷺ) ने उनसे पूछा कि तुमलोग रोजा क्यों रखते हो ?


उन्होंने जवाब दिया कि ये वो मुबारक दिन है जब अल्लाह तआला ने बनी-इसराइल को उनके दुश्मन से निज़ात दी थी । और हजरत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने इस दिन रोजा रखा था । तो नबी-ए-करीम (ﷺ) ने इरशाद फरमाया ; हम तुमसे ज्यादा दोस्त हैं और करीब है मूसा अलैहसलाम के , फिर आप (ﷺ) ने मुसलमानों को आशूरा का रोजा (Muharram Ka Roza) रखने का हुक्म दिया ।

📓 : Sahi Bukhari, Volume : 03, Page : 133, Kitab-As-Saum, Baab : Saum E Yaumal Aashura, Hadees : 2004


आशूरा के दिन (10 Muharram) को अदा की जाने वाली नफ्ल नमाज 

इमाम अब्दुर्रहमान इब्न अब्दुस्सलाम सफूरी लिखते हैं , नबी-ए-करीम (ﷺ) ने इरशाद फरमाया जो शख्स आशूरे के दिन 04 रकात नमाज इस तरह पढ़े के हर रकात में सूरह फातिहा के बाद 11 बार सूरह इख्लास पढ़े तो अल्लाह तआला उसके 50 साल के गुनाह गुनाह माफ फरमाएगा और उसके लिए नूर का मिम्बर बनाएगा । 

📓 : Nuzhatul Majalis Vol : 01, Pg : 181


हजरत अब्दुल्लाह इब्न मसूद (रज़ि.) से रिवायत है कि नबी अकरम (ﷺ) ने इरशाद फरमाया , जो शख्स यौमे आशूरा (Yaum e Ashura) के दिन अपने घरवालों पे खाने पीने में कुशादगी करेगा वो साल भर तक बराबर कुशादगी में रहेगा ।

📓 : 

  1. Imam Bayhaqi Shoebul Imaan Vol : 03, Pg : 366, Hadees : 3790
  2. Maa Sabata Bis Sunnah, Pg : 10
  3. Shah Abdul Haq Muhaddis Dahelvi Ashatul Lam’aat Shara E Mishkat Vol : 03, Pg : 135
  4. Imam Ghazali Muqashafatool Quloob Pg :655


Yaum e Ashura (10 Muharram) Ki Fazilat 

  1. 10 Muharram के दिन अर्श, कुर्सी, आसमान, ज़मीन, सूरज, चांद, सितार, और जन्नत बनाए गए ।
  2. यौम ए आशूरा के दिन ही आदम (अलैहिस्सलाम) को पैदा किया गया ।
  3. इसी दिन उन्हें जन्नत में दखिल किया गया और इसी दिन आपकी तौबा भी क़बूल की गई ।
  4. आशूरा के रोज़ (10 Muharram) हज़रत इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) पैदा हुए , और इसी दिन उन्हे आग से निजात मिली ।
  5. यौम ए आशूरा के रोज़ हज़रत इदरीस (अलैहिस्सलाम) को मकाम-ए-बुलंद की तरफ उठाया गया ।
  6. आशूरा के दिन हजरत अय्यूब (अलैहिस्सलाम) की तकलीफ राफे'अ की गई ।
  7. यौम ए आशूरा के दिन हजरत यूसुफ (अलैहिस्सलाम) को गहरे कुंए से निकाला गया ।
  8. आशूरा के दिन (10 Muharram) , हजरत यूनुस (अलैहिस्सलाम) को मछली के पेट से निकाला गया ।
  9. यौम ए आशूरा के दिन हजरत याकूब (अलैहिस्सलाम) की बिनाई का ज़ौफ दूर हुआ ।
  10. आशूरा के दिन हजरत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) को मुल्क-ए-अजीम अता किया गया ।
  11. आशूरा के दिन हजरत नूह (अलैहिस्सलाम) की कश्ती कोह-ए-जुदी पर जाकर ठहरी ।
  12. यौम ए आशूरा (10 Muharram) के दिन हजरत मूसा (अलैहिस्सलाम) को नजात मिली और फिरौन अपनी कौम समेत गरक हुआ ।
  13. आशूरा के दिन हजरत ईसा (अलैहिस्सलाम) पैदा किए गए और इसी दिन उनको आसमानों की तरफ उठा लिया गया ।
  14. आसमान से जमीन पर इसी दिन सबसे पहली बारिश नाजिल हुई ।
  15. और यौमे आशूरा के दिन (10 Muharram) का रोजा उम्मतो में मशहूर था यहां तक कि यह भी कहा गया है कि इस दिन का रोजा माहे रमजान से पहले फर्ज़ था फिर मनसूख कर दिया गया और हुजूर (ﷺ) ने हिजरत से पहले इस दिन का रोजा रखा - मुकाशफतुल कुलब ।।

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आखिरी बात - yaum e ashura

दोस्तों उम्मीद है कि आपको यौम ए आशूरा की फजीलत और 10 मुहर्रम की फजीलत से जुड़ी दूसरी मालूमात के बारे में लिखी गई हमारी ये पोस्ट जरूर पसन्द आई होगी । इस पोस्ट को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ भी जरूर शेयर करें । आखिर में दुआ है कि अल्लाह तआला हमें कहने सुनने से ज्ने की तौफीक अता फरमाए । (आमीन!) | Ashura Ke Roze Ki Fazilat | 9 Aur 10 Muharram Ke Roze Ki Fazilat

Muhammad Saif is the author and Editor of Aazad Hindi News Website.

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